Physics Objective – Spherical Lenses | गोलीय लेंस| Oneliner


गोलीय लेंस (Spherical lenses)-

लेन्स एक ऐसा समांग पारदर्शी माध्यम होता है जो दो गोलीय अथवा एक गोलीय व एक समतल पृष्ठों से घिरा होता है 

लेन्स दो प्रकार के होते है 

1-अवतल लेन्स (अपसारी लेन्स)

2-उत्तल लेन्स (अभिसारी लेन्स)

प्रकाश का वर्ण विक्षेपण (Dispersion of light )-

न्यूटन के अनुसार जब प्रकाश की किरण एक पतले प्रिज्म से गुजरती है तो निर्गत किरण अपने मार्ग से विचलित होने के साथ साथ सात विभिन्न रंगों के प्रकाश मे विभक्त हो जाती है इस घटना को वर्ण विक्षेपण कहते है 

प्रिज्म से श्वेत प्रकाश के कारण प्राप्त सात रंगों की पट्टिका (Band) को वर्ण क्रम या स्पेक्ट्रम कहते है इस स्पेक्ट्रम मे रंगों का क्रम इस प्रकार होता है -बैगनी, नीला, आसमानी, हरा, पीला, नारंगी तथा लाल या अंग्रेजी मे – (VIBGYORI )

किसी वस्तु का रंग उसके द्वारा परिवर्तित होने वाला प्रकाश होता है 

बैगनी रंग सबसे अधिक तथा लाल रंग सबसे कम विचलित होता है 

लाल, हरा, और नीले रंग को प्राथमिक रंग या मूल रंग कहते है 

मैजेंटा, मोरनी रंग व पीला द्वितीयक  रंग कहलाते है 

यदि किसी वस्तु से सफेद प्रकाश के सभी सात रंग परावर्तित होते है तो वह वस्तु हमें सफेद सफेद दिखाई पड़ती है 

यदि किसी वस्तु द्वारा सफेद प्रकाश के सभी सात रंग अवशोषित हो जाते है तो वह वस्तु हमें काली दिखाई पड़ती है 

विधुतिकी (Electricity)-

भौतिक विज्ञानं की वह शाखा जिसमे आवेशो का अध्ययन किया जाता है विद्युतिकी कहलाती है इसकी दो उपशाखाये होती है 

स्थिर विद्युतिकी (Electrostatics)-

गतिक विद्युतिकी(Electrodynamics)-

विद्युतिकी की वह शाखा जिसमे स्थिरवस्था मे आवेशों का अध्ययन किया जाता है 

विद्युतिकी कहलाती है तथा गतिक अवस्था मे आवेशों का अध्ययन गतिक विद्युतिकी कहलाती है 

आवेश द्रव्य का एक मूल गुण है इसे द्रव्य से अलग करना असंभव है यह दो प्रकार के होते है 

1-धनावेश -किसी पिण्ड अथवा कर्ण पर पदार्थ मे इलेक्ट्रान की कमी को धनावेश कहते है धनावेशन पर इसका द्रव्यमान कुछ घट जाता है 

2-ऋणावेश -किसी पिण्ड अथवा कर्ण पर पदार्थ मे इलेक्ट्रान की अधिकता को ऋणावेश कहते है ऋणावेश पर इसका द्रव्यमान कुछ बढ़ जाता है 

3- किसी वस्तु को घर्षण अथवा प्रेरणा के द्वारा आवेशित किया जा सकता है 

—रसायन विज्ञानं —

रसायन विज्ञानं के कुछ आधारभूत सिद्धांत –

द्रव्य और उनकी अवस्थाये —

द्रव्य (matter)-

द्रव्य वह है जो स्थान घेरता है तथा जिससे भार होता है 

द्रव्य तीन भौतिक अवस्थाओ मे पाया जाता है ठोस, द्रव, गैस 

ठोस (Solid)–

द्रव्य की वह अवस्था जिससे उसका आकार तथा आयतन निश्चित होता है ठोस अवस्था कहलाती है 

द्रव्य (Liquid)-

द्रव्य की वह अवस्था जिसमे उसका आयतन तो निश्चित होता है लेकिन आकर उस पात्र के आकर जैसा हो जाता है जिसमे वह रखा गया है द्रव अवस्था कहलाती है 

गैस (Gas)–

द्रव की वह अवस्था जिसमे उसका आयतन तथा आकर निश्चित नहीं होते है लेकिन उस पात्र के आयतन जितने व आकर जैसे हो जाते है जिसमे उसे रखा जाता है गैस अवस्था कहलाती है 

तत्व (Element)-

सामान प्रकार (सामान परमाणु क्रमांक) के परमाणुओं से बने हुए शुद्ध पदार्थ को तत्व कहते है 

वर्तमान मे 115 तत्व ज्ञात है जिनमे से 92 तत्व प्रकृति मे पाये जाते है जबकि शेष 23 तत्व कृत्रिम रूप से बनाये जाते है 

यौगिक (Compound)

यौगिक दो या दो से अधिक तत्वों के निश्चित अनुपात मे रासायनिक संयोग से बनते है 

यौगिक को उनके अवयवों मे भौतिक विधियों द्वारा पृथृक नहीं किया जा सकता है 

यौगिक के गुण उसके अवयव तत्वों के गुणों से भिन्न होते है 

यौगिक के गलनांक तथा क्वथनांक निश्चित होते है 

यौगिक के प्रत्येक भाग का सघटन समान होता है अत एक समांगी द्रव्य है 

मिश्रण (Mixture)–

मिश्रण दो या दो से अधिक किन्ही भी पदार्थो को अनुपात मे मिलाने से बन जाते है 

मिश्रण के अवयवों को भौतिक विधियों द्वारा पृथक किया जा सकता है 

मिश्रण के क्वथनांक व गलनांक निश्चित नहीं होते तथा ये अपने अवयवों के गुण प्रदर्शित करते है 

मिश्रण समांगी तथा विषमांगी दोनों प्रकार के हो सकते है 

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