घर्षण के नियम | Friction Law |Physics Objective – Oneliner


घर्षण (Friction )-

घर्षण बल वह विरोधी बल है जो दो सतहों के बीच होने वाली आपेक्षिक गति का विरोध करता है 

घर्षण के नियम (Laws of friction )

घर्षण बल बस्तु की गति की दिशा के विपरीत दिशा मे कार्य करता है 

घर्षण बल संपर्क मे स्थित सतहों की प्रकृति पर निर्भर करता है 

घर्षण बल संपर्क मे स्थित सतहों के क्षेत्रफल पर निर्भर नही करता, 

लोटनी घर्षण बल का मान फिसलने वाले घर्षण बल से कम होता है 

घर्षण बल अभिलम्ब प्रतिक्रिया के अनुक्रमानुपाती होता है 

लाभ -घर्षण बल के कारण ही हम पृथ्वी की सतह पर चलते है 

गाड़ियों के ब्रेक घर्षण बल के कारण ही कार्य करता है  

बर्फ पर कम घर्षण के कारण ही उत्तरी ध्रुव पर बिना पहिये वाली गाड़ी प्रयोग करते है 

हानि -(Disadavantage )

घर्षण बल के कारण ऊर्जा का हास् होता है तथा मशीने मे टूट फुट होती है 

घर्षण बल के कारण ही गाड़ियों का वेग एक निश्चित मान से अधिक नहीं हो सकता 

घर्षण को कम करने की विधियां –

स्नेहक का प्रयोग करके, उदाहरण तेल अथवा ग्रीस 

बाल l-बियरिंग का प्रयोग करके 

गत्यात्मक घर्षण के स्थान पर लोटनी घर्षण का प्रयोग करके 

साबुन के घोल का प्रयोग करके 

पाउडर का प्रयोग करके 

प्रकृति मे कार्यरत बल -(Force operating in nature )-

गुरुत्वीय बल -(Gravitational Force ) Fg –

यह व्युत्क्रम वर्ग के नियम का पालन करता है 

यह सदैव आकर्षण बल होता है 

यह सबसे क्षीण बल है परन्तु परास बहुत अधिक है 

यह केंद्रीय तथा संरक्षीं बल है 

गणितीय रूप मे इसे निम्न प्रकार व्यक्त किया जा सकता है 

Fg =GMm/r2

क्षीण बल —

ये बल रेडिओएक्टिव पदार्थो मे बीटा कर्णो के साथ संयुक्त रहता है 

ये बल गुरुत्वीय बलों की अपेक्षा 10^25  गुना अधिक प्रबल होते है 

विधुत चुम्बकीय बल -(Electromagnetic Force )-

ये बल गुरुत्वीय बलों की अपेक्षा बहुत अधिक प्रबल होते है 

यह व्युत्क्रम वर्ग के नियम का पालन करता है 

ये बल आकर्षण अथवा प्रतिकर्षण बल होते है तथा इनकी परास अधिक होती है 

ये बल प्रोटान के लिए गुरुत्वीय बल से 10^36 गुना अधिक प्रबल तथा क्षीण बल से 10^11 गुना अधिक प्रबल होते है 

प्रबल बल (strong Force )fs –

ये नाभिकीय बल है 

ये आकर्षण बल है 

पाई -मेसान नाभिकीय बलों का आधार है 

ये बहुत तीव्र तथा लघुपरास बल है 

ये गुरुत्वीय बलों से 10^38 गुना अधिक प्रबल है 

ये केंद्रीय बल नहीं है 

कार्य, सामर्थ्य, और ऊर्जा -(Work power and energy )-

कार्य -(Work )

किसी वस्तु पर बल लगाकर बल की दिशा मे विस्थापन को कार्य कहते है अर्थात 

कार्य =बल *विस्थापन OR   W=F.S

SI  पद्धति मे कार्य का मात्रक जुल है 

A-धनात्मक कार्य -(Positive work done )-

जब कोई वस्तु स्वतंत्र रूप से गुरुत्व के आधीन गिरती है 

जब घोड़ा समतल सडक पर गाडी को खींचता है 

B-ऋणात्मक कार्य -(Negative work done )

जब कोई वस्तु एक खुरदरी सतह पर फिसलती है 

जब एक धनावेश कण दूसरे धनावेश कर्ण की ओर जाता है 

C -शून्य कार्य -(Zero work done )

जब एक कुली सिर पर बोझ लिए समतल प्लेटफॉर्म पर चलता है 

जब वस्तु वृत्त पर एक पूरा चक्कर लगती है 

जब एक व्यक्ति अधिक बोझ लिए हुए अपने स्थान से विस्थापित नहीं होता 

सामर्थ्य (Power)–

कार्य करने की दर को सामर्थ्य कहते है 

यदि t समय मे किया गया कार्य W हो तो सामर्थ्य 

P = W/T

Si पद्धति मे सामर्थ्य का मात्रक जुल /सेकंड अथवा वाट है 

ऊर्जा (Energy)- किसी वस्तु के कार्य करने की क्षमता को ऊर्जा कहते है 

यह अदिश राशि है तथा इसका si मात्रक जुल है 

ऊर्जा के कई रूप है उदाहरण के लिए यांत्रिक ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा, ध्वनी ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा आदि 

यांत्रिक ऊर्जा दो प्रकार की होती है -1-गतिज ऊर्जा,  2-स्थितिज ऊर्जा 

गतिज ऊर्जा (Kinetik Energy)-

किसी वस्तु की गति के कारण उसमे जो ऊर्जा होती है उसे गतिज ऊर्जा कहते है 

यदि म द्व्यमान की वस्तु v वेग से चल रही हो तो उस वस्तु की गतिज ऊर्जा 

K=1/2mv^2

उदाहरण –

वायु की गतिज ऊर्जा पवन चक्की को चलाने के काम मे आती है 

पानी की ऊर्जा के कारण ही बन्दूक की गोली लक्ष्य मे धस जाती है 

स्तिथिज ऊर्जा -(Potential Energy)-

किसी वस्तु की स्तिथि के कारण उसमे जो ऊर्जा होती है उसे स्तिथिज ऊर्जा कहते है 

यदि म द्रव्यमान की वस्तु पृथ्वी तल से ऊचाई पर स्थित हो तो वस्तु की स्थितज ऊर्जा U=mgh 

उदाहरण –

लिपटे हुए स्प्रिंग की स्थितिज ऊर्जा घड़ी चलाने के लिए प्रयुक्त की जाती है 

तने m द्व्यमान की वस्तु पृथ्वी तल से ह ऊचाई पर स्थित हो तो वस्तु की स्थितज ऊर्जा U=mgh 

उदाहरण –

लिपटे हुए स्प्रिंग की स्तिथिज ऊर्जा घड़ी चलाने के लिए प्रयुक्त की जाती है 

तने हुए धनुष की स्थित पानी की स्थितज ऊर्जा का प्रयोग वैद्युत ऊर्जा का उत्पादन करने मे किया जाता है 

ऊर्जा का रूपांतरण -(Transformation of energy )-

ऊष्मा इंजन मे उष्मीय ऊर्जा, यांत्रिक ऊर्जा मे परिवर्तित होती है 

वैद्युत हीटर मे बैधुत ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा मे परिवर्तित होती है 

बैधुत बल्ब मे वैद्युत ऊर्जा, प्रकाश ऊर्जा मे परिवर्तित होती है 

जलता हुआ कोयला, तेल आदि मे रासायनिक ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा मे परिवर्तित होती है 

जब हम अपने दोनों हाथो को आपस मे रगड़ते है तो यांत्रिक ऊर्जा, उष्मीय ऊर्जा मे परिवर्तित होती है 

दण्ड चुम्बक मे बैधुत ऊर्जा, चुम्बकीय ऊर्जा मे बदलती है 

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