History objective – असहयोग आन्दोलन & साइमन कमीशन-


असहयोग आन्दोलन (1920-1922 ई•)–

1920 ई में लाला लाजपत राय की अध्यक्षता में हुए कलकत्ता अधिवेशन में असहयोग आन्दोलन का प्रस्ताव पारित किया गया और कांग्रेस के नागपुर अधिवेशन में इसकी पुष्टि कर दीं 

गाँधीजी ने इस दौरान बहिष्कार की घोषणा की विधार्थीयों ने विद्यालय तथा वकीलों ने अदालतो का बहिष्कार किया 

गाँधी जी केसर ए हिन्द की उपाधि लौटा दीं 17 नवम्बर 1921 को प्रिन्स ऑफ़ वेल्स के आगमन पर देश में सार्वजनिक हड़ताल की गई 

5 फरवरी 1922 को चौरी चौरा में आंदोलनकारियों द्वारा पुलिस स्टेशन को जलाए जाने के बाद गाँधीजी ने असयोग आन्दोलन स्थगति करने की घोषणा की 

मुहम्मद अली पहले नेता थे जिन्हे सर्वप्रथम असहयोग आन्दोलन में गिरफ़्तार किया गया

शिक्षा सस्थाओं का असहयोग आन्दोलन के समय सर्वाधिक बहिष्कार बंगाल मे हुआ 

चौरी -चौरा काण्ड के बाद 12 फरवरी 1922 को इस आन्दोलन को समाप्त कर दिया गया 

असहयोग आन्दोलन के प्रमुख रचनात्मक कार्यक्रम —

राष्ट्रीय विद्यालयों तथा पंचायती अदालतों की स्थापना 

अस्पृश्यता का अन्य हिन्दू मुश्लिम एकता 

स्वदेशी का प्रसार और कताई बुनाई 

असहयोग आन्दोलन के प्रमुख नकारात्मक कार्यक्रम —

सरकारी उपाधियों व प्रशस्तिः पत्रों को लौटना 

सरकारी स्कूलो, कॉलेज, अदालतों विदेशी कपड़ो आदि का बहिष्कार 

सरकारी उत्सवो समारोह का बहिष्कार 

विदेशी वस्तुओ का बहिष्कार तथा स्वदेशी का प्रचार 

अवैतनिक पदों  से तथा स्थानीय निकायों के नामांकित पदों से त्याग पत्रा 

स्वराज पार्टी (1923 ई )–

असहयोग आन्दोलन के स्थगित होने के बाद मोतीलाल नेहरू सी आर दास तथा एन सी केलकर ने इलाहाबाद में 1923 ई में स्वराज पार्टी का गठन किया 

स्वराज पार्टी ने 1923 ई में हुए विधानसभा चुनावो में भाग लिया तथा अच्छो सफलता प्राप्त की 

1925 ई विट्ठल भाई पटेल को सेन्ट्रल लेजिस्लेटिव असेम्ब्ली का अध्यक्ष चुना जाना स्वराजियों की एक महत्वपूर्ण उपलब्धि थी 

साइमन कमीशन (1927-28 ई )–

8 नवम्बर 1927 में को साइमन कमीशन का गठन किया गया इस कमीशन के सभी 7 सदस्य ब्रिटिश थे 

इस आयोग का कार्य भारतीय जनता के संवैधानिक अधिकारों के स्वरूप पर विचार करना था किसी भारतीय को शामिल नहीं करने के कारण भारत में इस कमीशन का तीव्र विरोध हुआ 

3 फरवरी 1928 को साइमन कमीशन के बम्बई पहुंचने पर हड़ताल आयोजित की गई 

लाहौर में साइमन कमीशन का विरोध करते हुए पुलिस की लाठी से लाला लाजपत राय घायल हुए जिनकी बाद में 1928 ई में मृत्यु हो गई 

बारदोली सत्याग्रह —

गुजरात के बारदोली में किसानो पर 30% अतिरिक्त लगान वृद्धि की गई इसका किसानो ने विरोध किया 

आन्दोलन का नेतृत्व बल्ल्भ भाई पटेल ने किया यहाँ की महिलाओ ने उन्हें सरदार की उपाधि दीं 

नेहरू रिपोर्ट (1928 ई•)–

साइमन कमीशन के विरोध एवं बहिष्कार से पूर्व ही संविधान निर्माण के लिए 19 मई 1928 को एक सम्मलेन आयोजित किया गया 

मोतीलाल नेहरू की अध्यक्षता में एक समिति गठित की गई जिसके सदस्य थे सर अली इमाम तेजबहादुर, सप्रु, मेगल सिंह, सुभाषचंद्र बोस, एन एम जोशी आदि जिसमे संविधान के सिद्धांतो को निर्धारित किया 

नेहरू रिपोर्ट 28 अगस्त 1928 को प्रकाशित हुई इसमें केंद्र में द्विस्दनात्मक व्यवस्था तथा प्रांतीय स्वायत्तता को ख़ारिज कर दिया सिख समुदाय भी इससे संतुस्ट नहीं था 

लाहौर अधिवेशन (1929 ई •)—

1929 ई• में लाहौर में कांग्रेस का वार्षिक अधिवेशन आयोजित हुआ इसकी अध्यक्षता जवाहरलाल नेहरू ने की और 31 दिसंबर 1929 को रीवा नदी के तट पर तिरंगा झण्डा फहराया 

इस अधिवेशन में पूर्ण स्वराज को कांग्रेस का अंतिम लक्ष्य निर्धारित किया गया 

26 जनवरी 1930 को स्वतंत्रता दिवस मनाने का प्रस्ताव पारित किया गया 

गाँधीजी को सविनय अवज्ञा आंदोलन चलाने के लिए नेतृत्व प्रदान किया गया 

दाण्डी मार्च (1930 ई•)–

12 मार्च 1930 ई • को गाँधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ जिनमे वेब मिलार् (अंग्रेज) भी था साबरमती आश्रम से दाण्डी तट की यात्रा आरम्भ की इस यात्रा का उददेश्य नमक कानून का उल्घंन करना था इस कारण इसे नमक सत्याग्रह भी कहा जाता है 

5 अप्रैल 1930 को नमक कानून तोड़कर गाँधीजी ने सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया 

प्रथम गोलमेज सम्मलेन —(1930 ई )—-

प्रथम गोलमेज सम्मेलन का आयोजन 12 नवम्बर 1930 से 13 जनवरी 1931 तक लन्दन में हुआ 

इस सम्मलेन ka उदघाटन ब्रिटेन के सम्राट जार्ज पंचम ने किया तथा अध्यक्षता प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने की 

इस सम्मलेन में कांग्रेस ने भाग नहीं लिया हिन्दू महासभा मुश्लिम लीग तथा उदारवादी नेताओं के प्रतिनिधियों ने इसमें भाग लिया बी आर अम्बेडकर ने दलित वर्ग का प्रतिनिधित्व किया 

गाँधी इरविन समझौता (1931 ई •)—

5 मार्च 1931 को गाँधी तथा इरविन के मध्य समझौता हुआ इसे दिल्ली समझौता कहा गया 

सविनय अवज्ञा आंदोलन को समाप्त करने की सहमति 

सभी राजनितिक बंदियों की रिहाई जिनके विरूद्ध हिंसा का आरोप नही था 

विदेशी कपड़ो और शराब की दुकानों पर शांतिपूर्ण धरना देने का अधिकार 

समुद्र तटीय प्रदेशो में बिना नमक कर दिए नमक बनाने की अनुमति 

गाँधीजी ने द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन में भाग लेने  ka प्रस्ताव मान लिया 

द्वितीय गोलमेज़ सम्मलेन (1931 ई. )

1-7 दिसंबर 1931 तक इसका आयोजन लन्दन में किया गया इस सम्मेलन में गाँधीजी ने कांग्रेस के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया 

द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन असफल रहा भारत वापस आकर गाँधीजी ने पुन सविनय अवज्ञा आन्दोलन आरम्भ किया 

द्वितीय गोलमेज़ सम्मेलन में मदन मोहन मालवीय और ऐनी बेसेंट ने खुद के खर्च पर हिस्सा लिया था 

साम्प्रदायिक पंचाट (1932 ई •)—

16अगस्त 1932 को तत्कालीन ब्रिटिश प्रधानमंत्री रैम्जे मैकडोनाल्ड ने साम्प्रदायिक पंचाट जारी किया इसमे मुश्लिम, सीखो,  भारतीय, ईसाईयों, के साथ दलित वर्गो के लिए भी पृथक निर्वाचित पद्धति भी लागू की गई इसे कम्युनल अवार्ड भी कहा जाता है 

पूना पैक्ट (1932 ई )—

महात्मा गाँधी ने दलितों को पृथक निर्वाचित मण्डल प्रदान करने वाले कम्युनल अवार्ड का विरोध करने के लिए 20 सितम्बर 1932 को यरवदा जेल में आमरण अनशन आरम्भ किया 

मदन मोहन मालवीय के प्रयासों से 25 सितम्बर 1932 को बी आर अम्बेडकर तथा गाँधीजी के बीच एक समझौता हुआ जिसमे दलितों के लिए 75 की जगह सुरक्षित स्थानों की संख्या 148 करने तथा संयुक्त निर्वाचन मण्डल स्वीकार करने की बात कही गई इसे पूना पैक्ट कहा गया 

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