Chemistry in hindi – नाभिकीय विखण्डन | Nuclear Fussion


नाभिकीय विखण्डन (Nuclear Fission)-

सन 1938 me ऑटो हान तथा फिट्ज़ स्ट्रासमैन ने ज्ञात किया की जब U -235 पर मंद गति के न्युट्रानो की बौछार की जाती है तो यूरेनियम 235 का भारी नाभिक मध्यम द्रव्यमान के दो खंडो मे विभक्त हो जाता है और इसके साथ बहुत अधिक ऊर्जा उतसर्जित होती है इस नाभिकीय अभिक्रिया को नाभिकीय विखण्डन कहते है अत वह प्रक्रिया जिसमे एक भारी नाभिक दो छोटे नाभिको मे टूट जाता है तथा अपार ऊर्जा उत्पन्न करता है नाभकीय विखण्डन कहलाता है 

परमाणु बम इसी सिंद्धांत पर आधारित है 

न्यूक्लियर रिएक्टर एक विशेष प्रकार की भटटी है जिसमे U-235 का नियंत्रण नाभिकीय विखण्डन कराया जाता है रिएक्टरो मे कैडमियम की छडे, न्युट्रानो अवशोषक का कार्य करती है इन छड़ो को नियत्रण कहते है भारी जल तथा ग्रेफाइट का कार्य न्युट्रानो की गति को मंद करना है अर्थात भारी जल तथा ग्रेफाइट मंदक का कार्य करते है यूरेनियम 235- ईंधन का कार्य करता है 

नाभकीय संलयन (Nuclear Fusion )-

नाभकीय संलयन वह प्रक्रिया है जिसमे दो हल्के नाभिक संयोजित होकर  एक भारी नाभिक का निर्माण करते है तथा अत्यधिक मात्रा मे ऊर्जा उत्पन्न करते है क्योंकि उत्पाद का कुल भार, अभिकारक के कुल भार से कम होता है 

हाइड्रोजन बम, नाभकीय संलयन के सिद्धांत पर आधारित है 

रेडियो कार्बन काल कार्बनिक मूल की पुरातत्व वस्तुओ की आयु ज्ञात करने मे प्रयोग किया जाता है सौर ऊर्जा का स्त्रोत नाभकीय संलयन है 

आक्सीकरण (Oxidation)-

परमाणुओं आयनो या अणुओ द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रान त्यागने की प्रक्रिया आक्सीकरण कहलाती है 

आक्सीकरण के द्वारा किसी तत्व की धनात्मक संयोजकता बढ़ जाती है 

इलेक्ट्रान त्यागना आक्सीकरण है 

किसी तत्व की आक्सीकरण अवस्था धनात्मक, ऋणात्मक, शून्य या भिन्न हो सकती है 

अपचयन (Reduction)-

परमाणुओं आयनो तथा अणुओ द्वारा एक या एक से अधिक इलेक्ट्रान ग्रहण करने की प्रक्रिया अपचयन कहलाती है 

अपचयन मे तत्व की धनात्मकता संयोजकता घटती है 

आक्सीकरण और अपचयन साथ साथ सामान मात्रा मे हो सकते है 

आक्सीकरण (Oxidising agent) –

वह प्रदार्थ जो रासायनिक प्रक्रिया मे इलेक्ट्रान ग्रहण करता है आक्सीकरण कहलाता है 

सभी धनवेशित तत्व आक्सीकारक की तरह व्यवहार करते है 

आक्सीकारक पदार्थ लुईस क्षार होते है 

अपचायक (Reducing agent )-

वे पदार्थ जो रासायनिक प्रक्रिया मे इलेक्ट्रान देते है अपचायक कहलाते है 

सभी ऋणावेशित पदार्थ, अपचायक की तरह व्यवहार करते है 

अपचायक पदार्थ लुईस अम्ल होते है 

आवर्त सारणी (Periodic Table )-

सन 1869 मे एशियाई वैज्ञानिक मेंडलीफ ने तत्वों का प्रथम आवर्ती वर्गीकरण दिया 

तत्वों के गुण उनके परमाणुओं भारो के आवर्ती फलन है 

मेंडलीफ के समय मे 63 ज्ञात तत्व थे जिन्हे उन्होंने सात आवर्ती (क्षैतिज कालमो ) तथा आठ वर्गो (खड़े कालमो ) मे बांटा 

आधुनिक आवर्त नियम के अनुसार तत्वों के गुण उनके परमाणु क्रमांको के आवर्ती फलन है 

मेंडलीफ की संशोधित आवर्त सारणी को 18 खड़े कालम (जिन्हे समूह कहते है ) तथा सात क्षैतिज कालमो (जिन्हे आवर्त कहते है ) मे बांटा गया 

आवर्तों के सामान्य लक्षण

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर तत्वों मे संयोजीं एलेक्ट्रोनो की संख्या 1 से 8 तक बढ़ती है 

आवर्तों मे तत्वों को बढ़ते हुए परमाणु क्रमांक के अनुसार रखा गया है

आवर्तों मे बाये से दाये जाने पर तत्वों की संयोजकता पहले एक से चार तक बढ़ती है फिर 4 से 1 तक क्रमशः घटती है 

आवर्तों मे बाये से दाये जाने पर परमाणु का आकार क्रमशः घटता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये चलने पर परमाणु का आकर घटने के कारण तत्वों की अधात्विकता प्रकृति भी घटती जाती है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर तत्वों का अपचयन गुण घटता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर आक्साइड का क्षारीय गुण घटता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर आक्साइडो का क्षारीय गुण घटता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर ऋणाविद्युतीं प्रकृति, अधात्विक प्रकृति तथा आक्साइडो का अम्लीय गुण क्रमशः बढ़ता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर आयनन विभव क्रमश बढ़ता है 

प्रत्येक आवर्त मे बाये से दाये जाने पर इलेक्ट्रान बंधुता भी सामान्यतः बढ़ती है 

वर्गो के सामान्य लक्षण

आवर्त सारणी मे वर्गो के सभी तत्वों मे संयोजी इलेक्ट्रानो की संख्या सामान होती है 

प्रत्येक समूह मे ऊपर से निचे जाने पर परमाणु त्रिज्या मे वृद्धि होती है 

प्रत्येक समूह मे ऊपर से निचे जाने पर धन विद्युती प्रकृति धात्विकता अपचायक गुण तथा आक्साइडो का क्षारीय गुण क्रमशः बढ़ता है 

प्रत्येक समूह मे ऊपर से निचे जाने पर ऋणविद्युति प्रकृति अधात्विकता तथा आक्साइडो का अम्लीय गुण परमाणु क्रमांक बढ़ने के साथ साथ घटता है 

आवर्त सारणी मे समूह मे ऊपर से निचे जाने पर आयनन विभव, इलेक्ट्रान बन्धुता क्रमशः घटते है 

साबुन (Soap)-

उच्च वसीय अम्लों के सोडियम एवं पोटेशियम लवण साबुन कहलाते है जैसे -सोडियम पलमीटेड, स्टीरेड, तथा सोडियम ओलिएट आदि, 

साबुन के निर्माण मे आवश्यक प्रयुक्त सामग्री जन्तुओ की चर्बी, बनस्पति तेल सोडियम हाइड्राक्साइड, सोडियम क्लोराइड, आदि, (अत साबुन, बनाने का प्रक्रम साबुनीकरण कहलाता है )

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