Blood Group | Nervous -| Biology MCQ – Biology Objective –


रुधिर समूह -(Blood Group)-

1902 इo मे नोबेल पुरस्कार विजेता कार्ल लैंडस्टीन ने रुधिर समूहों की खोज की मनुष्यों मे चार रुधिर समूह होते है A, B, AB,O,ो समूह का रुधिर किसी भी मनुष्य को दिया जा सकता है इसे सर्वदाता (Universal Donor)कहते है AB समूह सभी रुधिर समूहों से रुधिर ग्रहण कर सकता है इसे सर्वग्राही (Universal Recipient) कहते है 

Rh Factor –

Rh एक प्रकार का एंटीजन होता है जो लाल रुधिर कोशिकाओं मे पाया जाता है जिस मनुष्य के शरीर मे यह पाया जाता है वह Rh+ एवं जिसके शरीर मे नहीं पाया जाता है वह Rh- कहलाता है भारत मे लगभग 97% लोग Rh+ के है यदि किसी Rh- वाले व्यक्ति को Rh+ वाले व्यक्ति का रुधिर दे दिया जाये तो उसकी मृत्यु हो जाएगी 

तन्त्रिका तन्त्र (Nervous System)- 

ये तन्त्र मानव के शरीर में होने वाली क्रियाओ का नियमन एवं नियत्रण करता है 

मष्तिष्क, मेरु रज्जु तथा तंत्रिकाए इस तन्त्र के अंग है 

मस्तिष्क (Brain) तन्त्रिका तन्त्र का सर्वप्रथम अंग है 

मष्तिष्क को तीन भागो में विभाजित किया जा सकता है 

वृहत मस्तिष्क (Cerebrum)-

यह मस्तिष्क का सबसे बड़ा भाग है यह इच्छा शक्ति स्मरण शक्ति, अनुभव सुनना, देखना, सूघना बोलने तथा शरीर में चेतना के कार्यों को नियत्रित्त करता है 

लघु मस्तिष्क(Cerebellum)-

यह शरीर को संतुलित तथा मांसपेशियों के कार्यों को नियत्रित करता है 

मेड्यूला आबलोंगेटा (Medulla Oblongata)-

यह कशेरुक दण्ड(vertebral Column) के न्यूरल के नाल में प्रवेश करने के बाद मेरु रज्जु(Spinal Cord) कहलाता है तथा हृदय की धड़कन, पाचन अंगों एवं श्वसन अंगों के कार्यों को नियंत्रित करता है 

आँखों की पलकों का झपकना एक अनैच्छिक (Involuntray) क्रिया है औसतन हर 6 सेकंड में एक बार पलक झपकती है 

आँसू का निकलना एक प्रतिवर्ती (Reflexive)क्रिया है 

जिन अंगों से पर्यावरण एवं बाहरी परिवेश का ज्ञान होता है ज्ञानेन्द्रिया कहलाती है नेत्र, Skin, Tongue, Ear, तथा नाक 

उत्सर्जन तन्त्र (Excretory System)-

जीवो के शरीर में उपापचयी क्रियाओ के फलस्वरूप बने विषैले अपशिष्ट पदार्थो (Waste Products) के निष्कासन को उतसर्जन (Excretion) कहा जाता है 

नाक फेफड़े, त्वचा यकृत बड़ी आँत एवं वृक्क (Kidney) मनुष्य के उत्सर्जी अंग है 

श्वसन के दौरान कार्बन डाई आक्साइड गैस का उतसर्जन फेफड़े द्वारा होता है जल का उतसर्जन वृक्क को छोड़कर त्वचा द्वारा सम्प्पन होता है ठोस अपशिष्ट भोजन का अपचित भाग बड़ी आँत से होते हुये गुदा मार्ग द्वारा उतसर्जित होता है 

तरल पदार्थो के उतसर्जन के लिए जटिल क्रिया सम्पादित होती है जिसका संपादन वृक्क द्वारा होता है रुधिर में पोषक तत्व एवं अपशिष्ट पदार्थ दोनों ही होते है वृक्क द्वारा उपयोगी पदार्थो छनकर शरीर में ही रह जाते है शरीर में वृक्क की संख्या दो होती है यदि इनमे से एक वृक्क काम करना बन्द कर दे तो दूसरा वृक्क अकेले ही पूरा कार्य कर सकता है 

वृक्क की कार्यात्मक इकाई को (nephron)कहा जाता है 

वृक्क के काम न करने के कारण मनुष्य को जीवित रखने के लिए अपोहन नामक आपात सेवा प्रदान की जाती है 

24 घंटे में लगभग 2लीटर मूत्र का उतसर्जन होता है 

अन्त स्त्रावी तन्त्र (Endocrine System)

अन्त स्त्रावी ग्रंथिया (Endocrine Glands)-

इन ग्रंथियों में अपने स्त्राव को लक्ष्य अंगों तक ले जाने हेतु नलिकाए नहीं होती है 

अन्त स्त्रावी ग्रंथियों से संबन्धित विज्ञानं andokrainology कहलाता है 

इनके स्त्राव (हार्मोन्स) का परिवहन रुधिर द्वारा होता है उदाहरण -थायराइड, पिट्यूटरी, हाइपोथैलेमस, एड्रिनल, आदि 

हार्मोन्स (Harmones)-

ये अन्त स्त्रावी ग्रंथियों से अल्प मात्रा में स्त्रावित होने वाले कार्बनिक पदार्थ है 

ये जैव उत्प्रेरक के रूप में कार्य करते है अत ये शरीर की क्रियाओ को प्रेरित करते है उनकी गति को बढ़ा देते है अथवा घटा देते है 

ये सूचना के प्रथम वाहक अणु होते है 

ये अन्त वातावरण को नियत्रित करते है तथा अन्य हार्मोन्स की क्रिया को अनुमानित प्रदान करते है 

हार्मोन्स की खोज बेलेस (Bayliss) और अनेस्ट एच स्टलिग (Ernst H Starling ) ने सीक्रिटीन हार्मोन्स के रूप में की थी 

जनन तन्त्र (Reproductive System)-

नर जनन तन्त्र (Male Reproductive System)-

वृषण, वृषणकोष, के अंदर बन्द रहते है 

एपिडिडाइमिस सेमीनीफेरस ट्यूब्युलस (seminiferous tubules )के जुड़ने से बनी कुंडलीत नलिका है 

शीशन पेशीय अंग है जिसमे रुधिर आपूर्ति अत्यधिक होती है 

नर में स्पेरंटोजोआ (13-14) वर्ष की उम्र में बनने  प्रारम्भ हो जाते है तथा पूरी उम्र बनते है 

शरीर पर बालो का उगना स्कूलाइन नर लिंग हार्मोन्स के कारण होता है 

मादा जनन तन्त्र (Female Reproductive System)-

वयस्कता के पश्चात् अण्डाशय में प्रत्येक 28 दिन के अंतराल पर अण्डाणु (Ovum egg Cell )बनता है 

विकसित हो रहा भ्रूण को रुधिर आदि की आपूर्ति करता है 

गर्भाशय में भ्रूण 9 महीने तक विकास करता है यह काल गर्भाधान काल (Gestation Period ) 280 दिन कहलाता है 

विकास के पश्चात् बच्चा गर्भाशय से बाहर निकलता है और माँ बच्चे को दूध द्वारा पोषित करती है  

महिलाओ में जनन क्षमता 10-14 वर्ष की उम्र में प्रारब्ध होकर मैनोपोज (Menopause) तक रहतीं है मैनोपोजका औसत समय 52 वर्ष है 

योनि से रोजधर्म (Menstrual Cycle) के दौरान रुधिर स्त्राव रजोस्त्राव (Menstruation) कहलाता है 

रोजधर्म की सामान्य अवधि 28 दिन होती है 

यह गर्भावस्था के दौरान अनुपस्थिति होता है तथा मैनोपोज के दौरान पूर्ण रूप से बन्द हो जाता है 

महिलाओ के दोनों अण्डाशयो से एक वर्ष में लगभग 13 परिपक्व अण्डाणु बनते है 

परखनली शिशु (Test Tube  Baby)

बच्चा जो उस अण्डाणु से विकसित हुआ है जिसका निषेचन कृत्रिम रूप से (शरीर से बाहर ) करके महिला के गर्भाशय में आगे के विकास हेतु डाला गया है परखनली शिशु कहलाता है 

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